आज है श्री मोक्षदा एकादशी व्रत और श्री गीता जयंती, जानिए पूजन विधि


आज है श्री मोक्षदा एकादशी व्रत और श्री गीता जयंती, जानिए पूजन विधि

मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को ‘मोक्षदा एकादशी’ कहा गया है, और यह पावन तिथि इस वर्ष 01 दिसंबर, सोमवार को मनाई जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन महाभारत के युद्ध के दौरान भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता का उपदेश दिया था। इसलिए यह तिथि श्री गीता जयंती के रूप में भी अत्यंत श्रद्धा से मनाई जाती है।


🛕 मोक्षदा एकादशी व्रत: पूजन विधि

  • सुबह स्नान कर पवित्रता के साथ व्रत का संकल्प लें।

  • घर के मंदिर में धूप-दीप जलाकर भगवान विष्णु की पूजा आरंभ करें।

  • भगवान के चतुर्भुज स्वरूप की तस्वीर या मूर्ति पर पंचामृत से अभिषेक करें।

  • रोली, सिंदूर, धूप, दीप, पुष्प, तुलसी पत्ते और मिष्ठान/फल अर्पित करें।

  • देसी घी का दीपक जलाएं और मोक्षदा एकादशी की कथा का श्रवण करें।

  • पूरे दिन नियम, संयम और सत्संग का पालन करने का विशेष महत्व है।


📚 श्री गीता जयंती का महत्व

भगवद्गीता के प्रादुर्भाव को 5000 वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, फिर भी इसका दिव्य ज्ञान आज भी उतना ही प्रासंगिक और प्रभावशाली है। गीता जीवन के हर क्षेत्र में मार्गदर्शन देने वाली सर्वकालिक ग्रंथ मानी जाती है।

प्रसिद्ध वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टाइन ने गीता के महत्व पर कहा था—
“जब मैं भगवद्गीता पढ़ता हूं और ईश्वर ने किस प्रकार विश्व-ब्रह्मांड की रचना की, इस पर विचार करता हूं, तब अन्य सभी कुछ मेरे लिए अप्रयोजनीय प्रतीत होता है।”


रिपोर्ट: संजय कुमार धीरज | साहिबगंज न्यूज डेस्क

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