मातृ शक्ति की आस्था का प्रतीक जितिया पर्व को लेकर गंगा स्नान की लगी भीड़
मातृ शक्ति की आस्था का प्रतीक जितिया पर्व को लेकर गंगा स्नान की लगी भीड़, घाटों पर भीड़ के बावजूद सुरक्षा के इंतज़ाम नहीं
साहिबगंज : जितिया महापर्व के एक दिन पहले शहर के विभिन्न गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। मान्यता है कि नहाए-खाए के दिन गंगा स्नान करने के बाद ही भोजन ग्रहण किया जाता है। इसके साथ ही महापर्व की औपचारिक शुरुआत होती है, जो उपवास और पूजा-अर्चना के साथ अगले दिन संपन्न होता है।
शनिवार की सुबह व्रती महिलाएं गंगा स्नान के लिए विभिन्न घाट पर पहुंचीं। महिलाओं ने स्नान के बाद निर्जला उपवास का संकल्प लिया। क्षेत्र की अन्य नदी घाटों पर भी महिलाएं स्नान के लिए पहुंचीं। इस दौरान नदियों में जलस्तर अधिक होने से स्नान में जोखिम था, लेकिन मातृत्व प्रेम के आगे यह खतरा कम नजर आया।
घाटों पर भीड़ के बावजूद सुरक्षा का कोई खास इंतजाम नहीं था। जितिया पर्व की पौराणिक कथा राजकुमार जीमूतवाहन से जुड़ी है। उन्होंने नागकुमार की रक्षा के लिए गरुड़ के सामने अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे। तभी से यह व्रत संतान की रक्षा के लिए किया जाता है।
अश्विन मास की अष्टमी को माताएं निर्जला व्रत रखती हैं। पहले दिन स्नान कर व्रत शुरू करती हैं। दूसरे दिन बिना भोजन-पानी के जीमूतवाहन की पूजा करती हैं। नवमी को स्नान और पूजन के बाद व्रत खोला जाता है। व्रत के दौरान महिलाएं एक साथ कथा सुनती और गीत गाती हैं। मान्यता है कि इस व्रत से संतान के जीवन से संकट दूर होते हैं। यह पर्व मातृ शक्ति की आस्था का प्रतीक है।

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