सूर्या हांसदा एनकाउंटर पर बवाल: बीजेपी ने निकाला आक्रोश मार्च, सीबीआई जांच की मांग


सूर्या हांसदा एनकाउंटर पर बवाल: बीजेपी ने निकाला आक्रोश मार्च, सीबीआई जांच की मांग

सूर्या हांसदा के कथित एनकाउंटर को लेकर राजनीतिक और सामाजिक संगठनों का गुस्सा चरम पर है। भारतीय जनता पार्टी ने इसे फर्जी एनकाउंटर और राजनीतिक हत्या करार देते हुए गुरुवार को स्टेशन चौक से फाटक तक आक्रोश मार्च निकाला, जिसमें हजारों लोग शामिल हुए।

बीजेपी ने इस मुठभेड़ को सुनियोजित हत्या बताते हुए दोषी पुलिसकर्मियों पर कठोर कार्रवाई और सीबीआई जांच की मांग की। बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि सूर्या हांसदा कोई अपराधी नहीं थे, बल्कि जल, जंगल, जमीन की रक्षा करने और समाज में शिक्षा का प्रसार करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता थे।

आक्रोश मार्च में शामिल पूर्व विधायक अनंत कुमार ओझा व अन्य नेताओं ने कहा कि गोड्डा, साहिबगंज और पाकुड़ इलाकों में खनन माफियाओं के इशारे पर पुलिस ने सूर्या की हत्या की है। वक्ताओं ने सवाल उठाया कि जब भी कोई सामाजिक या राजनीतिक कार्यकर्ता समाज हित में आवाज उठाता है, तो उस पर मुकदमे दर्ज किए जाते हैं। क्या ऐसे में उसे अपराधी करार कर हत्या कर दी जाएगी?

आक्रोश मार्च में शामिल नेताओं ने हेमंत सोरेन सरकार को आदिवासी विरोधी करार दिया। वक्ताओं ने कहा कि “अबुआ राज” का नारा देने वाली सरकार में आदिवासियों की आवाज को दबाने की साजिश हो रही है। पूर्व विधायक ने दावा किया कि पुलिस ने उभरते आदिवासी नेता सूर्या हांसदा की सुनियोजित हत्या की है। मार्च में बीजेपी से जुड़े आदिवासी नेताओं ने भी हिस्सा लिया और सरकार पर निशाना साधा।


11 अगस्त को हुआ था एनकाउंटर

गोड्डा पुलिस के अनुसार, सूर्या हांसदा को 10 अगस्त 2025 को देवघर के नवाडीह गांव से गिरफ्तार किया गया था। अगले दिन, 11 अगस्त को बोआरीजोर थाना क्षेत्र के कमलडोर पहाड़ के पास कथित मुठभेड़ में उसे मार गिराया गया। पुलिस का दावा है कि सूर्या ने हथियार छीनकर भागने की कोशिश की और पुलिस पर फायरिंग की, जिसके जवाब में उसे गोली मारी गई। हालांकि, सूर्या के परिजनों और झारखंड के लोगों ने इसे फर्जी एनकाउंटर बताया है। सूर्या की मां और पत्नी ने आरोप लगाया कि उनकी तबीयत खराब थी और वह भागने की स्थिति में नहीं थे।


रिपोर्ट: संजय कुमार धीरज | साहिबगंज न्यूज डेस्क

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