नहाय - खाय से लेकर पारण तक, यहां जानें जितिया व्रत की पूरी जानकारी
साहिबगंज : पितृ पक्ष के दौरान जितिया मनाया जाता है। इसे जीवित्पुत्रिका व्रत भी कहा जाता है। यह व्रत विवाहित महिलाएं पुत्र की लंबी आयु के लिए रखती हैं और संतान प्राप्ति के लिए भी जितिया का व्रत रखा जाता है। इस व्रत की शुरुआत नहाय-खाय से होती है। वहीं, समापन पारण से होता है।
हर साल आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जितिया मनाया जाता है। यह पर्व बिहार और झारखंड, उत्तरप्रदेश समेत नेपाल के कई हिस्सों में धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं। इससे एक दिन पूर्व यानी आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि पर नहाय-खाय मनाया जाता है।
इस साल 13 सितंबर को नहाय-खाय है। इस शुभ अवसर पर व्रती महिलाएं स्नान-ध्यान कर जीमूतवाहन की पूजा करती हैं। इसके बाद भोजन ग्रहण करती हैं। नहाय-खाय के दिन मडुआ की रोटी और नोनी की साग खाई जाती है। इसके साथ ही दही और चूड़ा भी खाया जाता है।
आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 14 सितंबर को है। इस तरह 14 सितंबर को जितिया का व्रत रखा जाएगा। कई बार तिथि में अंतर होने के चलते जितिया व्रत 36 घंटे का भी होता है। इस साल निर्जला व्रत एक दिन रखा जाएगा। वहीं, सूर्योदय से पहले व्रती सात्विक भोजन और जल ग्रहण करती हैं।
वैदिक पंचांग के अनुसार, 15 सितंबर को देर रात 03 बजकर 06 मिनट पर अष्टमी तिथि का समापन होगा। इसके बाद नवमी तिथि शुरू होगी। जितिया व्रत का पारण नवमी तिथि पर किया जाता है। इस प्रकार 15 सितंबर को सूर्योदय के बाद व्रती पारण कर सकती हैं।
पंचांग:
-
सूर्योदय – सुबह 06:05 बजे
-
सूर्यास्त – शाम 06:27 बजे
-
चन्द्रोदय – रात 11:18 बजे
-
चंद्रास्त – दोपहर 01:11 बजे
-
ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 04:33 से 05:19 बजे तक
-
विजय मुहूर्त – दोपहर 02:20 से 03:09 बजे तक
-
गोधूलि मुहूर्त – शाम 06:27 से 06:51 बजे तक
-
निषीथ मुहूर्त – रात 11:53 से 12:40 बजे तक
रिपोर्ट: संजय कुमार धीरज | साहिबगंज न्यूज डेस्क

0 Response to "नहाय - खाय से लेकर पारण तक, यहां जानें जितिया व्रत की पूरी जानकारी"
Post a Comment